पद्मपुराण एवं वराहपुराण की बातें अनुसार बत्तीस प्रकार के देव अपराध
🌺पद्मपुराण के अनुसार बत्तीस प्रकार के कर्म देव अपराध की श्रेणी मे आते हैं, जिन्हें मन्दिर में या भगवान के सामने कदापि नहीं करना चाहिए।
🌺वैसे भगवान तो कण-कण मे व्याप्त है, लेकिन कम से कम उनकी प्रतिमा या चित्र के सामने ऐसे कर्मो को करने से बचने का प्रयास करना चाहिए ।
🌺शास्त्रो का कथन है कि :-
अन्यत्र किया गया पाप तीर्थो मे जाने से धुल जाते है, परन्तू तीर्थो मे किया गया पाप बज्रलेप हो जाता है। अर्थात वो कभी मिटता नही, इसी प्रकार भगवान के सामने की गई अपराधो को भी समझे
1🌺-मन्दिर में जूते चप्पल पहनकर या सवारी पर चढकर जाना ।
2🌺- रथयात्रा, जन्माष्टमी आदी भगवत्सम्बन्धी उत्सवो को न करना या उनके दर्शन न करना ।
3🌺-भगवान के सामने जाकर प्रणाम न करना ।
4🌺-अशुद्ध अवस्था में भगवान् के दर्शन करना ।
5🌺-एक हाथ से प्रणाम करना ।
6🌺-भगवान् के सामने एक ही स्थान पर खड़े-खड़े परिक्रमा करना ।
7🌺-भगवान के आगे पैर फैलाकर बैठना ।
8🌺-भगवान के सामने पलंग या खाट पर बैठना ।
9🌺-भगवान के सामने-सोना
10🌺-भगवान के सामने- खाना
11🌺-भगवान के सामने- झूठ बोलना
12🌺-भगवान के सामने- जोर-जोर से बोलना
13🌺-भगवान के सामने-आपस में बातें करना
14🌺-भगवान के सामने-रोना-चिल्लाना
15🌺-भगवान के सामने-किसी को पीड़ा देना
16🌺-भगवान के सामने-किसी से झगड़ा करना