ओशो की 10 बातें
1 . जिस दिन आप ने यह सोच लिया कि आपने ज्ञान या जो भी आपको चाहिए था वो पा लिया है, आपकी अंदर से मृत्यु हो जाती है क्योंकि अब ना कोई आश्चर्य होगा, ना कोई आनंद और ना कोई अचरज। अब आप एक मृत वाला जीवन जीएंगे।
2 . आत्म ज्ञान एक समझ है कि यहीं सबकुछ है, यही बिलकुल सही है, बस यही है। आत्म ज्ञान यह जानना है कि ना कुछ पाना है और ना कहीं जाना है।
3 . अर्थ मनुष्य द्वारा बनाये गए हैं क्योंकि आप लगातार अर्थ जानने में लगे रहते हैं, इसलिए आप अर्थहीन महसूस करने लगते हैं। हर चीज में अर्थ निकालना गलत है। कुछ चीजों को वैसे ही स्वीकारिए जैसी वो हैं।
4 . जब मैं आपसे कहता हूं कि आप देवी–देवता हैं, तो मेरा मतलब होता है कि आप में असीम संभावनाएं हैं, आपकी क्षमताएं अनंत हैं।
5 . आप वह बन जाते हैं जो आप सोचते हैं कि आप वह हैं।
6 . प्रसन्नता सदभाव की छाया है, वो सदभाव का पीछा करती है। प्रसन्न रहने का कोई और तरीका नहीं है।
7 . जीवन कोई दुःखद घटना नहीं है, यह एक हास्य है. जीवित रहने का मतलब है हास्य का बोध होना।
8 . अधिक से अधिक भोले, कम ज्ञानी और बच्चों की तरह बनिए. जीवन को मजे के रूप में लीजिये क्योंकि यही वास्तविकता में जीवन है।
9 . अगर आप एक दर्पण बन सकते हैं तो आप एक ध्यानी भी बन सकते हैं। ध्यान दर्पण में देखने की कला है।
10 . उस तरह से मत चलिए जिस तरह डर आपको चलाए। उस तरह से चलिए जिस तरह प्रेम आपको चलाए। उस तरह चलिए जिस तरह ख़ुशी आपको चलाए।